गुरुवार, 6 मई 2021

मीडिया को रिपोर्टिंग का अधिकार लेकिन मद्रास हाईकोर्ट की भाषा सख्त : सुप्रीम कोर्ट

 चुनाव आयोग की याचिका पर तरस

‘‘चुनाव आयोग द्वारा कोरोना महामारी के भयंकर संकट में जहां चुनाव कराने से पांचों राज्य महामारी का केंद्र बन गया है वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा, चुनाव आयोग ने चुनाव कराकर डेमोक्रेसी को मजबूत किया है.’’

नई दिल्ली/दै.मू.ब्यूरो
कभी-कभी सुप्रीम कोर्ट का फैसला और टिप्पणी पक्षपाती लगने लगता है. ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के ऊपर किसी का दबाव है. शायद इसी दबाव में आकर सुप्रीम कोर्ट पक्षपाती बन जाता है. हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट ने महामारी के दौर में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव कराने और तेजी से वायरस फैलने से हो रही लोगों की मौत को लेकर चुनाव आयोग पर हत्या का मामला दर्ज करने का बयान दिया था. इसके साथ ही मीडिया के रिपोर्टिं पर भी मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को घेरा था. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मीडिया को रिपोर्टिंग का अधिकार है. परन्तु, मद्रास हाईकोर्ट की भाषा सख्त है. इतना ही नहीं, चुनाव आयोग द्वारा कोरोना महामारी के भयंकर संकट में जहां चुनाव कराने से पांच राज्य महामारी का केंद्र बन गया है वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा, चुनाव आयोग ने चुनाव कराकर डेमोक्रेसी को मजबूत किया है.


गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट द्वारा निर्वाचन आयोग पर हत्या का मामला कायम करने की टिप्पणी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर बुधवार को फैसला आया. इस दौरान कोर्ट ने आयोग और हाईकोर्ट, दोनों को निर्देश और सलाह दी. सुप्रीम कोर्ट ने यह बात भी स्पष्ट की है कि मीडिया के पास रिपोर्टिंग का अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि कोर्ट रूम में जो भी होता है उसको रिपोर्ट करना मीडिया का अधिकार है.


कोर्ट ने आगे कहा इस मामले में दो संवैधानिक संस्था है. हमें दोनों को बैलेंस करना होगा. कोरोना के मामले में सभी हाई कोर्ट ने अच्छा काम किया है. वहीं चुनाव आयोग ने भी चुनाव कराकर डेमोक्रेसी को मजबूत किया है. मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग पर जो टिप्पणी की वो कोरोना के हालात की वजह से था. लेकिन, उनकी भाषा सख्त थी. इसकी जरूरत नहीं थी. हाई कोर्ट को भाषा के इस्तेमाल पर ध्यान देना होगा.


जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट ने जो कहा वो सिर्फ मौखिक था. रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं था. इसलिए उसे रद्द करने की जरूरत नहीं है. चुनाव आयोग की मीडिया पर रोक लगाने की मांग खारिज की जाती है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आयोग को भी आदेशों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए था. खंडपीठ ने फैसले में मद्रास हाईकोर्ट के संदर्भ में कहा कि टिप्पणी और फैसले में उपयोग की जाने वाली भाषा संवैधानिक मूल्यों के प्रति संवेदनशील होनी चाहिए.

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